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श्रीबाणाष्टकम्

 ।। श्रीबाणाष्टकम् ।।


श्रीमत्कपर्दितटिनीतटशोभनाय

      शीतांशुरेखपरिकल्पितशेखराय।

नित्याय निर्मलगुणाय निरञ्जनाय

      नीहारहारधवलाय नमः शिवाय।।


डिण्डीरपिण्डपरिपाण्डुरविग्रहाय

      दीव्यज्जटापटलमण्डितमस्तका।

नागेन्द्रकृत्तिवसनाय निरामयाय

      नारायणप्रियतमाय नमः शिवाय।।


दर्वीकराकलितकुण्डलमध्यमानं (मण्ड्यमान)

      गण्डाय चण्डसुरशात्रवदण्डनाय।

आखण्डलादिसुरमण्डलमध्यमान (वन्द्यमान)

      पादाम्बुजाय वरदाय नमः शिवाय।।


कालान्तकाय कमलासनपूजिताय

      कल्याणशैलपरिकल्पितकार्मुकाय।

कन्दर्पदर्पदहनाय कलाधराय

      कारुण्यपुण्यनयनाय नमः शिवाय।।


विश्वेश्वराय वृषभोत्तमवाहनाय

      विध्वस्तदक्षविहरा(विहिता)ध्वरविभ्रमाय।

गङ्गाधराय गजदानवमर्दनाय

      दोर्दण्डदण्डविभवाय नमः शिवाय।।


सोमानलार्कपरिकल्पितलोचनाय

      सोमार्कवह्निमुनिपुङ्गवसेविताय।

भूतेश्वराय भुवनत्रयनायकाय

      भूत्यङ्गरागशुभदाय नमः शिवाय।।


नानाविधागमरहस्यविबोधकाय

      स्वीयानुभावपरिकल्पितभावना।

भक्तार भक्तिविवशान्मलनाशनाय

      स्वर्गापवर्गसुखदाय नमः शिवाय।।


लोकत्रयाध्व(घ)हरणोत्सुकमानसाय

      लोकत्रयार्चितपदाय जगन्मयाय।

श्रीभट्टबाणकविसूक्तिविराजिताय

      कैवल्यदाननिपुणाय नमः शिवाय।।


।। इति श्रीबाणाष्टकं सम्पूर्णम् ।।

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