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Mata Vaishno Devi Yatra 2026: कटरा से भवन संपूर्ण गाइड, नियम और बजट होटल्स

  Mata Vaishno Devi Yatra 2026: कटरा से भवन तक की संपूर्ण यात्रा गाइड, नए नियम, बेस्ट होटल्स, खर्च और ज़रूरी टिप्स Mata Vaishno Devi Yatra Complete Guide: हिंदू धर्म के चार प्रमुख शक्तिपीठों में से एक, माता वैष्णो देवी मंदिर जम्मू-कश्मीर के कटरा से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर त्रिकुटा पर्वत पर स्थित है। यहाँ भक्तों को माता रानी के तीन प्राकृतिक स्वरूपों—महाकाली, महालक्ष्मी और मां सरस्वती के पिंडी रूप में अलौकिक दर्शन होते हैं। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से आने वाले सभी श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यदि आप भी वर्ष 2026 में माता वैष्णो देवी यात्रा की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह विस्तृत यात्रा गाइड आपके सफर को बेहद आसान और सुखद बना देगी। इस लेख में हम कटरा से लेकर मुख्य भवन और भैरव घाटी तक की पूरी यात्रा, बेस्ट बजट होटल्स, नए नियम और खर्चों के बारे में विस्तार से जानेंगे। यह भी पढ़े:-  Char Dham Yatra 2026: चारधाम यात्रा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, VIP दर्शन बुकिंग और बेस्ट होटल पैकेज गाइड Diwali 2026 Date: जानिए सही तारीख, लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और इस दिन क्या खरीदना ह...

Devutthana Ekadashi 2026: देवउठनी एकादशी कब है? जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त और व्रत कथा

Devutthana Ekadashi 2026 Date, Shubh Muhurat, Puja Vidhi aur Vrat Katha: हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का स्थान सबसे ऊपर माना जाता है। इस पावन तिथि को देवउठनी एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अत्यंत शुभ दिन पर भगवान श्री हरि विष्णु चार महीने की लंबी योग निद्रा (चातुर्मास) से जागते हैं। भगवान विष्णु के जागते ही सनातन धर्म में पिछले चार महीनों से बंद पड़े सभी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश और नामकरण संस्कार फिर से पूरी तरह शुरू हो जाते हैं। इस विस्तृत लेख में हम आपको वर्ष 2026 में देवउठनी एकादशी की सही तारीख, तुलसी विवाह का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त, पूजा की प्रामाणिक विधि, महत्वपूर्ण नियम, ज्योतिषीय उपाय और पौराणिक व्रत कथा की पूरी जानकारी विस्तार से देने जा रहे हैं। इसे पढ़कर आप अपने व्रत और पूजा को सफल बना सकते हैं। यह भी पढ़े:-  Dhanteras aur Diwali Rashi Anusar Upay 2026: धनतेरस और दिवाली पर राशि अनुसार करें ...

Diwali 2026 Date: जानिए सही तारीख, लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और इस दिन क्या खरीदना होता है बेहद शुभ

Diwali 2026 Date in India: दीपावली सनातन धर्म का सबसे बड़ा और पवित्र त्योहार है। इसे सुख, समृद्धि और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चन की जाती है। साल 2026 में दिवाली की तारीख और लक्ष्मी पूजा के मुहूर्त को लेकर लोगों में काफी असमंजस है। आइए जानते हैं कि इस साल दिवाली कब है (When is Diwali 2026) , लक्ष्मी पूजा का सही समय क्या है और वास्तु के अनुसार इस दिन कौन सी चीजें खरीदना सबसे शुभ माना जाता है। साल 2026 में दिवाली कब है? (Diwali 2026 Date) हिंदू पंचांग और ड्रिक पंचांग (Drik Panchang) के अनुसार, इस साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026, दिन रविवार को सुबह 11:27 बजे से शुरू हो रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे होगा। चूंकि दीपावली पर लक्ष्मी पूजा हमेशा प्रदोष काल और महानिशीथ काल (रात के समय) में की जाती है, इसलिए इस साल दीपावली का मुख्य त्योहार 8 नवंबर 2026 (रविवार) को ही पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। लक्ष्मी पूजा 2026 का ...

Karwa Chauth 2026 Date: जानिए सही तारीख, करवा चौथ पूजा का मुहूर्त और चांद निकलने का समय

 "Karwa Chauth 2026: 28 या 29 अक्टूबर? जानिए पंचांग के अनुसार व्रत की सही तारीख" Karwa Chauth 2026 Date in India: हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र व्रतों में से एक माना जाता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी दांपत्य जीवन के लिए दिनभर निर्जला (बिना अन्न-जल के) व्रत रखती हैं। शाम के समय विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव और कार्तिकेय जी की पूजा की जाती है और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। साल 2026 में करवा चौथ की सही तारीख और पूजा के समय को लेकर अगर आपके मन में कोई सवाल है, तो आइए जानते हैं कि इस साल करवा चौथ कब है (When is Karwa Chauth 2026) , पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और चांद निकलने का संभावित समय क्या रहेगा। साल 2026 में करवा चौथ कब है? (Karwa Chauth 2026 Exact Date) हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल  कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 29 अक्टूबर 2026 को  (2...

संतोषी माता व्रत विधि और लाभ || Santoshi mata vrat vidhi or katha ||

  संतोषी माता व्रत विधि और लाभ  शुक्रवार का व्रत तीन तरह से किया जाता है। इस दिन भगवान शुक्र के साथ-साथ संतोषी माता तथा वैभवलक्ष्मी देवी का भी पूजन किया जाता है। तीनों व्रतों की विधियां अलग-अलग हैं। जो स्त्री-पुरुष शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत करते हैं, उनके लिए व्रत-विधि इस प्रकार है।   संतोषी माता व्रत विधि  सूर्योदय से पूर्व उठें। घर की सफाई कर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। घर के ही किसी पवित्र स्थान पर संतोषी माता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। संपूर्ण पूजन सामग्री तथा किसी बड़े पात्र में शुद्ध जल भरकर रखें। जल भरे पात्र पर गुड़ और चने से भरकर दूसरा पात्र रखें। संतोषी माता की विधि-विधान से पूजा करें। इसके पश्चात संतोषी माता की कथा सुनें। तत्पश्चात आरती कर सभी को गुड़-चने का प्रसाद बांटें। अंत में बड़े पात्र में भरे जल को घर में जगह-जगह छिड़क दें तथा शेष जल को तुलसी के पौधे में डाल दें। इसी प्रकार 16 शुक्रवार का नियमित उपवास रखें। अंतिम शुक्रवार को व्रत का विसर्जन करें। विसर्जन के दिन उपरोक्त विधि से संतोषी माता की पूजा कर 8 बालकों को खीर-पुरी का भोजन कराएँ तथ...

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दुर्गा सप्तशती पाठ 4 चतुर्थ अध्याय || by geetapress gorakhpur ||p

 ॥ श्री दुर्गा सप्तशती ॥ चतुर्थोऽध्यायः इन्द्रादि देवताओं द्वारा देवी की स्तुति ॥ध्यानम्॥ ॐ कालाभ्राभां कटाक्षैररिकुलभयदां मौलिबद्धेन्दुरेखां शड्‌खं चक्रं कृपाणं त्रिशिखमपि करैरुद्वहन्तीं त्रिनेत्राम्। सिंहस्कन्धाधिरूढां त्रिभुवनमखिलं तेजसा पूरयन्तीं ध्यायेद् दुर्गां जयाख्यां त्रिदशपरिवृतां सेवितां सिद्धिकामैः॥ सिद्धि की इच्छा रखनेवाले पुरुष जिनकी सेवा करते हैं तथा देवता जिन्हें सब ओर से घेरे रहते हैं, उन ‘जया ’ नामवाली दुर्गादेवी का ध्यान करे । उनके श्रीअंगों की आभा काले मेघ के समान श्याम है । वे अपने कटाक्षों से शत्रुसमूह को भय प्रदान करती हैं । उनके मस्तक पर आबद्ध चन्द्रमा की रेखा शोभा पाती है । वे अपने हाथों में शंख, चक्र, कृपाण और त्रिशूल धारण करती हैं । उनके तीन नेत्र हैं । वे सिंह के कंधेपर चढ़ी हुई हैं और अपने तेज से तीनों लोकोंको परिपूर्ण कर रही हैं । "ॐ" ऋषिरुवाच*॥१॥ शक्रादयः सुरगणा निहतेऽतिवीर्ये तस्मिन्दुरात्मनि सुरारिबले च देव्या। तां तुष्टुवुः प्रणतिनम्रशिरोधरांसा वाग्भिः प्रहर्षपुलकोद्‌गमचारुदेहाः॥२॥ ऋषि कहते हैं - ॥१॥ अत्यन्त पराक्रमी दुरात्मा महिषासुर तथा उसक...

दुर्गा सप्तशती पाठ 12 द्वादश अध्याय || by geetapress gorakhpur ||

  ।। श्री दुर्गा सप्तशती ॥ द्वादशोऽध्यायः देवी-चरित्रों के पाठ का माहात्म् ॥ध्यानम्॥ ॐ विद्युद्दामसमप्रभां मृगपतिस्कन्धस्थितां भीषणां कन्याभिः करवालखेटविलसद्धस्ताभिरासेविताम्। हस्तैश्चक्रगदासिखेटविशिखांश्चापं गुणं तर्जनीं बिभ्राणामनलात्मिकां शशिधरां दुर्गां त्रिनेत्रां भजे॥ मैं तीन नेत्रोंवाली दुर्गादेवी का ध्यान करता हूँ, उनके श्रीअंगों की प्रभा बिजली के समान है । वे सिंह के कंधेपर बैठी हुई भयंकर प्रतीत होती हैं । हाथों में तलवार और ढ़ाल लिये अनेक कन्याएँ उनकी सेवा में खड़ी हैं ।वे अपने हाथों में चक्र, गदा, तलवार, ढ़ाल, बाण, धनुष, पाश और तर्जनी मुद्रा धारण किये हुए हैं । उनका स्वरूप अग्निमय है तथा वे माथे पर चन्द्रमा का मुकुट धारण करती हैं । "ॐ" देव्युवाच॥१॥ एभिः स्तवैश्च् मां नित्यं स्तोष्यते यः समाहितः। तस्याहं सकलां बाधां नाशयिष्याम्यसंशयम्*॥२॥ देवी बोली- ॥१॥ देवताओं ! जो एकाग्रचित होकर प्रतिदिन इन स्तुतियों से मेरा स्तवन करेगा, उसकी सारी बाधा निश्चय हीं दूर कर दूँगी ॥२॥ मधुकैटभनाशं च महिषासुरघातनम्। कीर्तयिष्यन्ति ये तद्वद् वधं शुम्भनिशुम्भयोः॥३॥ जो मधुकैटभ का नाश, महिषा...

दुर्गा सप्तशती पाठ 11 एकादश अध्याय || by geetapress gorakhpur ||

  ॥ श्री दुर्गा सप्तशती ॥ एकादशोऽध्यायः देवताओं द्वारा देवी की स्तुति तथा देवी द्वारा देवताओं को वरदान ॥ध्यानम्॥ ॐ बालरविद्युतिमिन्दुकिरीटां तुङ्‌गकुचां नयनत्रययुक्ताम्। स्मेरमुखीं वरदाङ्‌कुशपाशाभीतिकरां प्रभजे भुवनेशीम्॥ मैं भुवनेश्वरी देवी का ध्यान करता हूँ । उनके श्रीअंगों की आभा प्रभात काल के सुर्य के समान है और मस्तक पर चन्द्रमा का मुकुट है । वे उभरे हुए स्तनों और तीन नेत्रों से युक्त हैं । उनके मुख पर मुस्कान की छटा छायी रहती है और हाथों में वरद, अंकुश, पाश एवं अभय - मुद्रा शोभा पाते हैं । "ॐ" ऋषिरुवाच॥१॥ देव्या हते तत्र महासुरेन्द्रे सेन्द्राः सुरा वह्निपुरोगमास्ताम्। कात्यायनीं तुष्टुवुरिष्टलाभाद्* विकाशिवक्त्राब्जविकाशिताशाः*॥२॥ ऋषि कहते हैं - ॥१॥ देवी के द्वारा वहाँ महादैत्यपति शुम्भ के मारे जाने पर इन्द्र आदि देवता अग्नि को आगे करके उन कात्यायनी देवी की स्तुति करने लगे । उस समय अभीष्ट की प्राप्ति होने से उनके मुख कमल दमक उठे थे और उनके प्रकाश से दिशाएँ भी जगमगा उठी थीं ॥२॥ देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वंक त्वमीश्व...

हनुमान चालीसा और आरती, बजरंग बाण श्रीं राम स्तुति || hanuman Chalisa ||

Hanuman Chalisa or Aarti:  मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है, इससे शनि जनित पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है, (चाहे शनि की ढैय्या हो या साढ़ेसाती) । इन दिनों में हनुमान जी के मंदिरों में जाकर भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं साथ ही इनका प्रिय बूंदी का प्रसाद चढ़ाते हैं। बजरंगबली को संकटमोचक भी कहा जाता है क्योंकि ये अपने भक्तों के सभी संकट दूर कर देते हैं। शास्त्रों और पुराणों अनुसार हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करके आरती करे और हनुमानजी को बूँदी का भोग लगाए. आइए शुरू करे हनुमान चालीसा का पाठ -    दोहा : श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।  बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।    चौपाई :   जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।     महाबीर बिक्रम बजरंग   कुमति निवार सुमति के संगी ।।   कंचन बरन बिराज सुबे...