अधिकतर सरपंच को खुद नहीं पता कि उसके पास कितनी ताकत है - और जनता को तो बिल्कुल नहीं!* संविधान और राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 ने सरपंच को 3 तरह की तलवारें दी हैं! 1. संविधान ने दिया - अनुच्छेद 243, 243छ, 243ज - 243 - पंचायत को स्वशासन की इकाई* - सरपंच उसका मुखिया - गांव का मुख्यमंत्री! - 243छ - 29 विषय - सारे अधिकार पंचायत को - सरपंच उनको लागू करेगा - 243ज - टैक्स लगाने का अधिकार - हाट-बाजार, मेला, दुकान, पानी पर टैक्स - सरपंच लगा सकता है 2. राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 ने दिए - 7 बड़े अधिकार - अधिकार 1 - प्रशासनिक अधिकार - धारा 32, 33 - सबसे बड़ी ताकत - ग्राम पंचायत की हर मीटिंग बुलाने का अधिकार- सरपंच ही अध्यक्ष! - सचिव, पटवारी, आंगनवाड़ी, आशा, ANM, टीचर - सब पर नियंत्रण - धारा 89 - सरपंच लिख के दे - "ये कर्मचारी काम नहीं करता" - BDO को हटाना पड़ेगा! - जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र पर सिफारिश - सरपंच के हस्ताक्षर के बिना कुछ नहीं! - ग्राम सभा बुलाने का अधिकार - साल में 4 बार - 26 जनवरी, 1 मई, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर - सरपंच ही बुलाएगा! अधिकार 2 - वित्तीय अ...
माँ धारी देवी उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत पवित्र और चमत्कारी हिंदू मंदिर है. इन्हें उत्तराखंड की रक्षक देवी और चार धामों (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) की संरक्षक शक्ति के रूप में पूजा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माँ धारी देवी को देश के 108 शक्ति स्थलों में से एक माना गया है. 1. मंदिर की अवस्थिति और स्वरूप (Location & Form) स्थान: यह भव्य मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कल्यासौड़ नामक स्थान पर स्थित है, जो श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच पड़ता है. माँ काली का स्वरूप: माँ धारी देवी को साक्षात देवी काली का रूप माना जाता है. कटी हुई मूर्ति का रहस्य: मंदिर में माता की मूर्ति का केवल ऊपरी आधा भाग (सिर वाला हिस्सा) विराजमान है. मान्यता है कि माता की मूर्ति का निचला आधा भाग (धड़) रुद्रप्रयाग जिले के कालीमठ मंदिर में स्थापित है, जहाँ उनकी माँ कालिका के रूप में पूजा होती है. 2. चमत्कारी रहस्य: दिन में तीन बार रूप बदलना माँ धारी देवी मंदिर का सबसे बड़ा चमत्कार यह है कि यहाँ स्थापित पाषाण प्रतिमा ...