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एंटेरोमिक्स क्या है?Enteromix cancer vaccine

ChatGPT said: एंटेरोमिक्स कैंसर वैक्सीन  एक प्रकार का  थेरेप्यूटिक कैंसर वैक्सीन 1.  एंटेरोमिक्स क्या है? 1. एंटेरोमिक्स क्या है? एंटेरोमिक्स  एक  कैंसर इम्यूनोथेरेपी वैक्सीन  है, जो विशेष रूप से कैंसर के इलाज के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह एक  थेरेप्यूटिक वैक्सीन  है, जिसका उद्देश्य कैंसर की रोकथाम नहीं बल्कि उपचार करना है। एंटेरोमिक्स का आधार  माइक्रोबायोम  (पेट में पाए जाने वाले बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों की प्रणाली) पर आधारित है। यह वैक्सीन शरीर के माइक्रोबायोम को बदलकर इम्यून सिस्टम को मजबूत करने की कोशिश करती है, ताकि यह कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया कर सके। 2.  काम करने का तरीका माइक्रोबायोम का इम्यून सिस्टम पर प्रभाव : एंटेरोमिक्स माइक्रोबायोम को प्रभावित करके इम्यून सिस्टम को इस तरह से बदलने का प्रयास करती है कि वह कैंसर कोशिकाओं को अधिक प्रभावी ढंग से पहचान सके और नष्ट कर सके। टी-सेल सक्रियण : यह वैक्सीन इम्यून सिस्टम की  टी-सेल  नामक कोशिकाओं को सक्रिय करने का काम करती है। टी-सेल्स शरीर...

शिलाजीत क्‍या है, शिलाजीत की पहचान कैसे करें?

 शिलाजीत.... शिलाजीत क्‍या है? शिलाजीत एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला खनिज पदार्थ है जो हिमालय और भारतीय उपमहाद्वीप की हिंदुकुश पर्वतमाला में पाया जाता है। ये एक दुर्लभ पदार्थ है जो हजारों वर्षों से  पौधों और पौधों की सामग्री के विघटन से बनता आया है। शिलाजीत एक गाढ़ा और लसलसेदार पदार्थ होता है। आयुर्वेद में शिलाजीत को रसायन (शक्‍तिवर्द्धक) कहा गया है क्‍योंकि इससे संपूर्ण सेहत में सुधार आता है। पहचान..  शिलाजीत के जरा से टुकड़े को लकड़ी के अंगार पर रखते ही अगर वह उपर की तरह खड़ा हो जाय तो उस शिलाजीत को असली समझना चाहिये । शिलाजीत को जरा सा लेकर अंगारे पर डालने से अगर धुआँ न उठे तो उसे उत्तम समझना चाहिये ।  शिलाजीत को एक तिनके की नोक में लगाकर पानी के कटोरे में डालना चाहिये । अगर वह सबका सब तार-तार होकर जल के नीचे बैठ जाये तो उसे उत्तम समझना चाहिये। शिलाजीत को नाक से सूंघने पर अगर उसमें गौमूत्र के समान गन्ध आवे और वह रङ्ग में काली तथा पतले गोंद के समान हो, वजन में हलका और चिकना हो तो उसे उत्तम समझना चाहिये । शिलाजीत के लाभ...   गठिया (arthritis) जोड़ो का शत्र...

त्रिफला महाऔषधि

 त्रिफला महा औषधि  (इसमें जितने प्रयोग हैं सभी अनुभूत हैं) त्रिफला के सेवन से अपने शरीर का कायाकल्प कर जीवन भर स्वस्थ रहा जा सकता है। आयुर्वेद की महान देन त्रिफला से हमारे देश का आम व्यक्ति परिचित है व सभी ने कभी न कभी कब्ज दूर करने के लिए इसका सेवन भी जरुर किया होगा। पर बहुत कम लोग जानते है इस त्रिफला चूर्ण जिसे आयुर्वेद रसायन भी मानता है से अपने कमजोर शरीर का कायाकल्प किया जा सकता है। बस जरुरत है तो इसके नियमित सेवन करने की, क्योंकि त्रिफला का वर्षों तक नियमित सेवन ही आपके शरीर का कायाकल्प कर सकता है। 1. पीली हरड़ का चूर्ण एक भाग, 2. बहेड़े के चूर्ण का दो भाग और, 3. आँवले के चूर्ण का तीन भाग। 4. इन तीनों फलों की गुठली निकाल कर खरल आदि में कूट-पीसकर चूर्ण का मिश्रण तैयार कर लें। यह मिश्रण काँच की बोतल में कार्क लगाकर रख दें, ताकि बरसाती हवा इसमें न पहुँच सके। चार माहकी अवधि बीत जानेपर बना हुआ चूर्ण काम में नहीं लेना चाहिये, क्योंकि यह उतना उपयोगी नहीं रह पाता है जितना होना चाहिये। ज्यादातर लोग 123 की मात्रा ही प्रयोग करते हैं परंतु योगी लोग 1 2 4 की मात्रा का भी प्रयोग करते ह...