सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Char Dham Yatra 2026: चारधाम यात्रा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, VIP दर्शन बुकिंग और बेस्ट होटल पैकेज गाइड

हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति में धार्मिक यात्राओं का एक अत्यंत पावन और विशेष महत्व माना गया है। भारत के कोने-कोने में स्थित पवित्र तीर्थस्थलों में से उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में स्थित चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra Uttarakhand) को मोक्षदायिनी और जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा माना जाता है। हर साल लाखों की संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु बाबा केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दिव्य दर्शनों के लिए देवभूमि उत्तराखंड पहुंचते हैं। यदि आप भी वर्ष 2026 में अपने परिवार के साथ इस पवित्र धार्मिक यात्रा (Religious Tourism) की योजना बना रहे हैं, तो यह विस्तृत गाइड आपके लिए मील का पत्थर साबित होगी। इस लेख में हम आपको चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन (Online Registration), वीआईपी दर्शन टिकट बुकिंग (VIP Darshan Booking), हेलीकॉप्टर टिकट और सबसे सस्ते व बेहतरीन बजट टूर पैकेजेस (Best Budget Tour Packages) के साथ-साथ ऑनलाइन होटल बुकिंग (Online Hotel Booking) की पूरी प्रामाणिक जानकारी विस्तार से देने जा रहे हैं। 1. चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत और कपाट खुलने की संभावित तिथि उत...

Dhanteras aur Diwali Rashi Anusar Upay 2026: धनतेरस और दिवाली पर राशि अनुसार करें ये अचूक उपाय, बरसेगी कृपा

Dhanteras aur Diwali Rashi Anusar Upay 2026 Laxmi Ganesh Puja


Dhanteras aur Diwali Rashi Anusar Upay 2026: हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति में दीपावली के महापर्व को सुख, समृद्धि और अंधकार पर प्रकाश की विजय का सबसे बड़ा प्रतीक माना गया है। हर व्यक्ति की यह कामना होती है कि उसके घर में कभी धन-धान्य की कमी न हो, परिवार में सुख-शांति बनी रहे और व्यापार दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की करे। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार, दिवाली और धनतेरस के ये पांच दिन बेहद दिव्य और ऊर्जा से भरपूर होते हैं। यदि इन पावन दिनों पर कोई भी मनुष्य अपनी राशि के अनुसार कुछ विशेष और सरल उपाय करता है, तो माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

इस विस्तृत लेख में हम आपको ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर सभी 12 राशियों के लिए दिवाली के अचूक महाउपाय, पूजा की सही विधि, महत्वपूर्ण नियम और कुछ ऐसे गुप्त टोटके बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने जीवन से हर प्रकार की दरिद्रता, कर्ज और आर्थिक तंगी को हमेशा के लिए समाप्त कर सकते हैं।

धनतेरस और दिवाली का धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व (Significance of Diwali & Dhanteras)

सनातन परंपरा में धनतेरस से लेकर भाई दूज तक चलने वाला यह 5 दिनों का दीपोत्सव केवल दीये जलाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा को अपने अनुकूल करने का महामुहूर्त है। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को माता लक्ष्मी स्वयं पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों के घरों में विचरण करती हैं।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, दिवाली की रात को 'महानिशीथ काल' कहा जाता है। इस रात में किए गए मंत्र जाप, दान और उपाय सामान्य दिनों की तुलना में हजार गुना अधिक शीघ्र फल प्रदान करते हैं। यदि आपकी कुंडली में धन का अभाव है, राहु-केतु जनित दोष हैं या शनि की ढैय्या/साढ़ेसाती के कारण काम रुके हुए हैं, तो राशि अनुसार किए गए ये उपाय आपके भाग्य के बंद दरवाजे खोल सकते हैं।

सभी 12 राशियों के लिए दिवाली के महाउपाय (Rashi Anusar Diwali Upay in Detail)

1. मेष राशि (Aries)

  • राशि का स्वामी: मंगल
  • शुभ रंग: लाल
  • अचूक उपाय: मेष राशि के जातकों को दिवाली की रात लक्ष्मी पूजा के समय मां लक्ष्मी को लाल रंग के ताजे गुलाब या गुड़हल के पुष्प अर्पित करने चाहिए। पूजा के बाद माता के चरणों से एक पुष्प उठाकर अपने धन रखने के स्थान या तिजोरी में रख लें। इसके साथ ही पूजा स्थल पर एक तांबे का बर्तन रखें।
  • लाभ: इस उपाय को करने से आपके कार्यक्षेत्र या नौकरी में आ रही सभी बाधाएं तुरंत दूर होंगी, रुका हुआ धन वापस मिलेगा और संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझेंगे।
2. वृषभ राशि (Taurus)
  • राशि का स्वामी: शुक्र
  • शुभ रंग: सफेद या चमकीला
  • अचूक उपाय: इस राशि के स्वामी ऐश्वर्य के देवता शुक्र हैं। वृषभ राशि के जातकों को धनतेरस या दिवाली के दिन कमल के गट्टे की माला से माता लक्ष्मी के सिद्ध मंत्र "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का कम से कम 3 माला जाप करना चाहिए। पूजा में सफेद रंग की मिठाइयां जैसे रसगुल्ला या मखाने की खीर चढ़ाएं।
  • लाभ: आपके जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं, वाहन और भूमि की कभी कमी नहीं होगी। आय के नए स्रोत खुलेंगे।
3. मिथुन राशि (Gemini)
  • राशि का स्वामी: बुध
  • शुभ रंग: हरा
  • अचूक उपाय: मिथुन राशि के लोगों को लक्ष्मी-गणेश पूजन के दौरान भगवान गणेश पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आप गणपति जी को 21 दूर्वा (हरी घास) की गाठें चढ़ाएं और बेसन या बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं। इसके अतिरिक्त, अपने घर के मुख्य द्वार पर हरे रंग की रंगोली बनाएं।
  • लाभ: यदि आपका व्यापार मंदा चल रहा है या आप पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, तो इस उपाय से व्यापार में भारी मुनाफा होगा और कर्ज से मुक्ति मिलेगी।
4. कर्क राशि (Cancer)
  • राशि का स्वामी: चंद्रमा
  • शुभ रंग: सफेद या सिल्वर
  • अचूक उपाय: कर्क राशि के जातकों का मन बहुत चंचल होता है क्योंकि इनका स्वामी चंद्रमा है। दिवाली की रात को आपको चांदी के एक सिक्के या बर्तन पर कलावा (मौली) बांधकर लक्ष्मी जी के सामने रखना चाहिए। साथ ही, पूजा के समय जलाए जाने वाले मुख्य दीपक में थोड़ा सा गाय का शुद्ध घी और एक टुकड़ा कपूर का डालकर प्रज्वलित करें।
  • लाभ: इससे मानसिक तनाव दूर होगा, घर के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ेगा और घरेलू क्लेश हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।
5. सिंह राशि (Leo)
  • राशि का स्वामी: सूर्य
  • शुभ रंग: सुनहरा, पीला या नारंगी
  • अचूक उपाय: सिंह राशि के स्वामी साक्षात सूर्य देव हैं। दिवाली के पावन दिन पर आपको घर में 'कनकधारा स्तोत्र' या 'श्री सूक्त' का पाठ अवश्य करना चाहिए। लक्ष्मी पूजा में एक पुराना या नया तांबे का सिक्का रखें और पूजा समाप्त होने के बाद उसे अपने पर्स या पॉकेट में हमेशा के लिए रख लें।
  • लाभ: समाज में आपका मान-सम्मान और मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। जो लोग सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं या राजनीति में हैं, उन्हें अपार सफलता मिलेगी।

6. कन्या राशि (Virgo)

• राशि का स्वामी: बुध

• शुभ रंग: हल्का हरा या कत्थई

• अचूक उपाय: कन्या राशि के जातकों को धनतेरस के दिन एक नई झाड़ू और साबुत धनिया जरूर खरीदना चाहिए। दिवाली की रात को पूजा के समय यह धनिया माता लक्ष्मी के चरणों में अर्पित करें। अगले दिन सुबह इस धनिए के कुछ दानों को अपने घर के गमले में बो दें और बाकी को एक लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें।

• लाभ: यह उपाय आपकी तिजोरी को कभी खाली नहीं होने देगा। अनावश्यक खर्चों और फिजूलखर्ची पर तुरंत रोक लगेगी।
7. तुला राशि (Libra)

• राशि का स्वामी: शुक्र

• शुभ रंग: क्रीम या सफेद

• अचूक उपाय: तुला राशि के जातकों को लक्ष्मी पूजा के दौरान मां लक्ष्मी को वस्त्र के रूप में एक छोटा सा लाल या गुलाबी रेशमी कपड़ा अर्पित करना चाहिए। पूजा में मां को इत्र (Perfume) चढ़ाएं। इसके साथ ही, पूजा स्थल पर 7 कौड़ियां रखें और पूजा के बाद उन्हें पीले कपड़े में बांधकर धन स्थान पर रख दें।

• लाभ: आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत होगी। यदि आपका पैसा कहीं लंबे समय से फंसा हुआ है, तो वह आसानी से वापस मिल जाएगा।
8. वृश्चिक राशि (Scorpio)

• राशि का स्वामी: मंगल

• शुभ रंग: गहरा लाल या मैरून

• अचूक उपाय: वृश्चिक राशि के लोगों को दिवाली की रात को लक्ष्मी पूजा संपन्न करने के बाद हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाना चाहिए और बजरंग बाण या हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। लक्ष्मी जी को सिंदूर का तिलक लगाएं और वही तिलक अपने माथे पर भी लगाएं।

• लाभ: आपके गुप्त शत्रुओं का नाश होगा, दुर्घटनाओं से रक्षा होगी और आकस्मिक धन लाभ (अचानक धन प्राप्ति) के योग बनेंगे।
9. धनु राशि (Sagittarius)

• राशि का स्वामी: बृहस्पति (गुरु)

• शुभ रंग: पीला

• अचूक उपाय: धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। आपको दिवाली की पूजा में पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। मां लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान विष्णु (नारायण) की पूजा अनिवार्य रूप से करें। पूजा में 11 गोमती चक्र रखें और उन पर हल्दी का तिलक लगाएं।

• लाभ: भाग्य का 100% साथ मिलेगा। घर में मांगलिक और धार्मिक कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न होंगे और संतान सुख की प्राप्ति होगी।
10. मकर राशि (Capricorn)

• राशि का स्वामी: शनि

• शुभ रंग: नीला या काला (पूजा में नीले वस्त्र पहन सकते हैं)

• अचूक उपाय: मकर राशि के स्वामी न्याय के देवता शनि देव हैं। दिवाली की शाम को ठीक सूर्यास्त के समय आपको अपने घर के मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओर सरसों के तेल के दीपक जलाने चाहिए। पूजा में मां लक्ष्मी को नीले रंग के फूल (यदि उपलब्ध हों) या शमी के पत्ते अर्पित करें।

• लाभ: शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती का नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा। व्यापार में आ रही मंदी दूर होगी और नौकरी में स्थिरता आएगी।
11. कुंभ राशि (Aquarius)

• राशि का स्वामी: शनि

• शुभ रंग: गहरा नीला या बैंगनी

• अचूक उपाय: कुंभ राशि के जातकों को दिवाली के दिन किसी प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर में जाकर घी का दीपक दान करना चाहिए। इसके अलावा, धनतेरस या दिवाली के दिन किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को काले तिल, कंबल या अन्न का दान अवश्य करना चाहिए। पूजा में मां लक्ष्मी के सामने अष्टगंध का धूप जलाएं।

• लाभ: अटके हुए सरकारी कार्य या अदालती मामले आपके पक्ष में सुलझेंगे। धन का प्रवाह निरंतर बना रहेगा।
12. मीन राशि (Pisces)

• राशि का स्वामी: बृहस्पति (गुरु)

• शुभ रंग: गहरा पीला या सुनहरा

• अचूक उपाय: मीन राशि के जातकों को लक्ष्मी पूजा के समय एक पीले कपड़े में थोड़ी सी हल्दी की गांठें, एक चांदी का सिक्का और थोड़े से अक्षत (बिना टूटे चावल) रखकर माता के चरणों में अर्पित करने चाहिए। पूजा के दौरान 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करें। बाद में उस पीले कपड़े की पोटली को अपनी तिजोरी में रख दें।

• लाभ: आध्यात्मिक उन्नति होगी, बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होगा और घर में सुख-समृद्धि का स्थायी वास होगा।

दिवाली पूजा की संपूर्ण सामग्री सूची (Diwali Puja Samagri List)

एक सफल पूजा के लिए सही सामग्री का होना अत्यंत आवश्यक है। नीचे दी गई सूची के अनुसार अपनी पूजा सामग्री पहले से ही एकत्रित कर लें:

• मूर्तियां: मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और माता सरस्वती की नई मिट्टी या धातु की मूर्ति।

• चौकी और कपड़ा: पूजा के लिए एक लकड़ी की चौकी और उस पर बिछाने के लिए लाल या पीला सूती/रेशमी कपड़ा।

• दीपक और तेल: एक बड़ा मुख्य दीया (पीतल या मिट्टी का), छोटे मिट्टी के दीये (21 या 31), शुद्ध गाय का घी और सरसों/तिल का तेल।

• पूजन सामग्री: कुमकुम, रोली, सिंदूर, अक्षत (बिना टूटे चावल), मौली (कलावा), अबीर, गुलाल, हल्दी, और अष्टगंध।

• सुगंध और धूप: इत्र की शीशी, अगरबत्ती, धूपबत्ती, और कपूर।

• अभिषेक सामग्री: गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, और शुद्ध घी (पंचामृत के लिए)।

• भोग और प्रसाद: खील-बताशे, बूंदी के लड्डू, पेड़े, मौसमी फल (विशेषकर अनार और सिंघाड़ा), और पंचमेवा।

• अन्य शुभ वस्तुएं: पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, नारियल (पानी वाला), कमल का फूल, और आम के पत्ते (वंदनवार ( कहीं कहीं इसको तोरण भी बोलते) के लिए।

दिवाली की रात लक्ष्मी पूजा की सरल और प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Diwali Puja Vidhi)

1. पवित्रिकरण: सबसे पहले स्वयं स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में गंगाजल लेकर अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर छिड़कें और कहें— "ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा..."।

2. चौकी की स्थापना: उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके लकड़ी की चौकी रखें। उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।

3. मूर्तियों की स्थापना: चौकी के बीच में माता लक्ष्मी और उनके दाईं ओर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें। पास में ही धन कुबेर और माता सरस्वती की भी स्थापना करें।

4. कलश स्थापना: चौकी पर थोड़े से चावल रखकर उस पर तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें। कलश में जल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते डालें, फिर उस पर नारियल रख दें।

5. अखंड दीप प्रज्वलन: पूजा शुरू करने से पहले घी का मुख्य दीपक जलाएं, जो पूरी रात जलना चाहिए।

6. संकल्प: हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर संकल्प लें कि आप माता लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए यह पूजा कर रहे हैं।

7. षोडशोपचार पूजन: देवताओं को जल अर्पित करें, रोली-चंदन से तिलक करें, अक्षत चढ़ाएं, वस्त्र अर्पित करें, और फिर फूल माला पहनाएं।

8. धूप-दीप और भोग: धूप और दीप दिखाएं। इसके बाद खील, बताशे, मिठाइयां और फलों का भोग लगाएं।

9. मंत्र जाप और स्तोत्र पाठ: अपनी राशि के अनुसार बताए गए मंत्र या श्री सूक्त/कनकधारा स्तोत्र का पाठ शांतिपूर्वक बैठ कर करें।

10. आरती और क्षमा प्रार्थना: पूजा के अंत में परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर लक्ष्मी जी और गणेश जी की आरती गाएं। पूजा में हुई किसी भी भूलचूक के लिए हाथ जोड़कर माता से क्षमा प्रार्थना करें।

सुख-समृद्धि के लिए वास्तु और ज्योतिष के 5 कड़े नियम (Important Vastu & Astrology Rules)

1. घर का मुख्य द्वार: दिवाली के दिन आपके घर का मुख्य द्वार सबसे साफ और सुंदर होना चाहिए। वहां पर आम या अशोक के पत्तों का वंदनवार (तोरण) अवश्य लगाएं।

2. दिशा का चयन: पूजा करते समय परिवार के मुखिया का मुख हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना जाता है।

3. कबाड़ और अंधेरा: घर के किसी भी कोने में, विशेषकर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में कोई कबाड़, टूटे-फूटे बर्तन या शीशा नहीं होना चाहिए। घर का कोई भी कोना अंधेरे में न रहे।

4. क्रोध और कलह से बचें: दिवाली के दिन घर में किसी भी प्रकार का विवाद, चिल्लाना या अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। जहां शांति और प्रेम होता है, वहीं लक्ष्मी का वास होता है।

5. रात का दीया: पूजा का मुख्य दीपक (अखंड ज्योति) दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके न रखें। इसे पूर्व या उत्तर की ओर रखें और ध्यान रखें कि यह पूरी रात बुझने न पाए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions - FAQs)

प्रश्न 1: क्या दिवाली के उपाय केवल रात में ही किए जा सकते हैं?

उत्तर: अधिकांश लक्ष्मी उपाय और मंत्र जाप प्रदोष काल या महानिशीथ काल (रात के समय) में करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। हालांकि, दान-पुण्य और खरीदारी से जुड़े उपाय आप दिन में भी कर सकते हैं।

प्रश्न 2: अगर धनतेरस पर राशि अनुसार वस्तुएं न खरीद पाएं तो क्या करें?

उत्तर: यदि आप महंगी वस्तुएं नहीं खरीद सकते, तो चिंता न करें। आप अपनी राशि के शुभ रंग का एक छोटा सा कपड़ा, साबुत धनिया या मिट्टी के दीपक खरीद सकते हैं। माता लक्ष्मी भाव देखती हैं, वस्तु की कीमत नहीं।

प्रश्न 3: दिवाली की पूजा में रखी गई कौड़ियों और गोमती चक्र का अगले दिन क्या करना चाहिए?

उत्तर: पूजा के अगले दिन सुबह स्नान करने के बाद, उन कौड़ियों, गोमती चक्र या सिक्कों को एक लाल या पीले रेशमी कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी, कैश बॉक्स या अलमारी में रख देना चाहिए। इन्हें खर्च नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion)

दीपावली का यह पावन पर्व हमारे जीवन से हर प्रकार के अंधकार, नकारात्मकता और दरिद्रता को मिटाने का एक स्वर्णिम अवसर है। शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि कर्म के साथ-साथ यदि ईश्वर की कृपा और ज्योतिषीय उपायों का सहारा लिया जाए, तो कठिन से कठिन समय भी आसानी से कट जाता है। इस लेख में आपकी राशि के अनुसार बताए गए ये उपाय बेहद सरल और अत्यधिक प्रभावशाली हैं। इन्हें पूरी श्रद्धा, शुद्धता और विश्वास के साथ करें। माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर देव की कृपा से आपका घर हमेशा खुशियों और धन-धान्य से भरा रहेगा।
आप सभी पाठकों को sambhooblog की ओर से दीपावली और धनतेरस की मंगलमय और हार्दिक शुभकामनाएं! माता लक्ष्मी आपके जीवन को सुखमय बनाएं।

डिस्क्लेमर (Disclaimer):

इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं, धार्मिक मान्यताओं और सामान्य लोक परंपराओं पर आधारित है। sambhooblog.in इसका उद्देश्य केवल आपको सामान्य आध्यात्मिक व धार्मिक जानकारियां (General Information) प्रदान करना है। इस लेख में बताए गए उपायों या युक्तियों की सटीकता, प्रभावशीलता या पूर्णता की हम कोई कानूनी गारंटी नहीं देते हैं। हर व्यक्ति की कुंडली, ग्रह-दशा और परिस्थितियां भिन्न हो सकती हैं, इसलिए किसी भी उपाय को आजमाने या किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या विशेषज्ञ से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लें। किसी भी उपाय के परिणामों के लिए यह ब्लॉग या लेखक जिम्मेदार नहीं होगा।

टिप्पणियाँ

Popular Posts

दुर्गा सप्तशती पाठ 4 चतुर्थ अध्याय || by geetapress gorakhpur ||p

 ॥ श्री दुर्गा सप्तशती ॥ चतुर्थोऽध्यायः इन्द्रादि देवताओं द्वारा देवी की स्तुति ॥ध्यानम्॥ ॐ कालाभ्राभां कटाक्षैररिकुलभयदां मौलिबद्धेन्दुरेखां शड्‌खं चक्रं कृपाणं त्रिशिखमपि करैरुद्वहन्तीं त्रिनेत्राम्। सिंहस्कन्धाधिरूढां त्रिभुवनमखिलं तेजसा पूरयन्तीं ध्यायेद् दुर्गां जयाख्यां त्रिदशपरिवृतां सेवितां सिद्धिकामैः॥ सिद्धि की इच्छा रखनेवाले पुरुष जिनकी सेवा करते हैं तथा देवता जिन्हें सब ओर से घेरे रहते हैं, उन ‘जया ’ नामवाली दुर्गादेवी का ध्यान करे । उनके श्रीअंगों की आभा काले मेघ के समान श्याम है । वे अपने कटाक्षों से शत्रुसमूह को भय प्रदान करती हैं । उनके मस्तक पर आबद्ध चन्द्रमा की रेखा शोभा पाती है । वे अपने हाथों में शंख, चक्र, कृपाण और त्रिशूल धारण करती हैं । उनके तीन नेत्र हैं । वे सिंह के कंधेपर चढ़ी हुई हैं और अपने तेज से तीनों लोकोंको परिपूर्ण कर रही हैं । "ॐ" ऋषिरुवाच*॥१॥ शक्रादयः सुरगणा निहतेऽतिवीर्ये तस्मिन्दुरात्मनि सुरारिबले च देव्या। तां तुष्टुवुः प्रणतिनम्रशिरोधरांसा वाग्भिः प्रहर्षपुलकोद्‌गमचारुदेहाः॥२॥ ऋषि कहते हैं - ॥१॥ अत्यन्त पराक्रमी दुरात्मा महिषासुर तथा उसक...

दुर्गा सप्तशती पाठ 12 द्वादश अध्याय || by geetapress gorakhpur ||

  ।। श्री दुर्गा सप्तशती ॥ द्वादशोऽध्यायः देवी-चरित्रों के पाठ का माहात्म् ॥ध्यानम्॥ ॐ विद्युद्दामसमप्रभां मृगपतिस्कन्धस्थितां भीषणां कन्याभिः करवालखेटविलसद्धस्ताभिरासेविताम्। हस्तैश्चक्रगदासिखेटविशिखांश्चापं गुणं तर्जनीं बिभ्राणामनलात्मिकां शशिधरां दुर्गां त्रिनेत्रां भजे॥ मैं तीन नेत्रोंवाली दुर्गादेवी का ध्यान करता हूँ, उनके श्रीअंगों की प्रभा बिजली के समान है । वे सिंह के कंधेपर बैठी हुई भयंकर प्रतीत होती हैं । हाथों में तलवार और ढ़ाल लिये अनेक कन्याएँ उनकी सेवा में खड़ी हैं ।वे अपने हाथों में चक्र, गदा, तलवार, ढ़ाल, बाण, धनुष, पाश और तर्जनी मुद्रा धारण किये हुए हैं । उनका स्वरूप अग्निमय है तथा वे माथे पर चन्द्रमा का मुकुट धारण करती हैं । "ॐ" देव्युवाच॥१॥ एभिः स्तवैश्च् मां नित्यं स्तोष्यते यः समाहितः। तस्याहं सकलां बाधां नाशयिष्याम्यसंशयम्*॥२॥ देवी बोली- ॥१॥ देवताओं ! जो एकाग्रचित होकर प्रतिदिन इन स्तुतियों से मेरा स्तवन करेगा, उसकी सारी बाधा निश्चय हीं दूर कर दूँगी ॥२॥ मधुकैटभनाशं च महिषासुरघातनम्। कीर्तयिष्यन्ति ये तद्वद् वधं शुम्भनिशुम्भयोः॥३॥ जो मधुकैटभ का नाश, महिषा...

दुर्गा सप्तशती पाठ 11 एकादश अध्याय || by geetapress gorakhpur ||

  ॥ श्री दुर्गा सप्तशती ॥ एकादशोऽध्यायः देवताओं द्वारा देवी की स्तुति तथा देवी द्वारा देवताओं को वरदान ॥ध्यानम्॥ ॐ बालरविद्युतिमिन्दुकिरीटां तुङ्‌गकुचां नयनत्रययुक्ताम्। स्मेरमुखीं वरदाङ्‌कुशपाशाभीतिकरां प्रभजे भुवनेशीम्॥ मैं भुवनेश्वरी देवी का ध्यान करता हूँ । उनके श्रीअंगों की आभा प्रभात काल के सुर्य के समान है और मस्तक पर चन्द्रमा का मुकुट है । वे उभरे हुए स्तनों और तीन नेत्रों से युक्त हैं । उनके मुख पर मुस्कान की छटा छायी रहती है और हाथों में वरद, अंकुश, पाश एवं अभय - मुद्रा शोभा पाते हैं । "ॐ" ऋषिरुवाच॥१॥ देव्या हते तत्र महासुरेन्द्रे सेन्द्राः सुरा वह्निपुरोगमास्ताम्। कात्यायनीं तुष्टुवुरिष्टलाभाद्* विकाशिवक्त्राब्जविकाशिताशाः*॥२॥ ऋषि कहते हैं - ॥१॥ देवी के द्वारा वहाँ महादैत्यपति शुम्भ के मारे जाने पर इन्द्र आदि देवता अग्नि को आगे करके उन कात्यायनी देवी की स्तुति करने लगे । उस समय अभीष्ट की प्राप्ति होने से उनके मुख कमल दमक उठे थे और उनके प्रकाश से दिशाएँ भी जगमगा उठी थीं ॥२॥ देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वंक त्वमीश्व...

हनुमान चालीसा और आरती, बजरंग बाण श्रीं राम स्तुति || hanuman Chalisa ||

Hanuman Chalisa or Aarti:  मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है, इससे शनि जनित पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है, (चाहे शनि की ढैय्या हो या साढ़ेसाती) । इन दिनों में हनुमान जी के मंदिरों में जाकर भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं साथ ही इनका प्रिय बूंदी का प्रसाद चढ़ाते हैं। बजरंगबली को संकटमोचक भी कहा जाता है क्योंकि ये अपने भक्तों के सभी संकट दूर कर देते हैं। शास्त्रों और पुराणों अनुसार हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करके आरती करे और हनुमानजी को बूँदी का भोग लगाए. आइए शुरू करे हनुमान चालीसा का पाठ -    दोहा : श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।  बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।    चौपाई :   जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।     महाबीर बिक्रम बजरंग   कुमति निवार सुमति के संगी ।।   कंचन बरन बिराज सुबे...