सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Bhulekh Uttarakhand 2026: Check Khangra Khatauni & Bhunaksha Online

Digital Land Records & Property (उत्तराखंड लोकल और सरकारी गाइड) : Bhulekh Uttarakhand 2026: अपनी जमीन का खसरा-खतौनी और भू-नक्शा ऑनलाइन कैसे निकालें? यूआरएल स्लग: bhulekh-uttarakhand-khashra-khatauni-online-check आर्टिकल  डिजिटल इंडिया अभियान के तहत देश के लगभग सभी राज्यों ने अपने राजस्व और भूमि रिकॉर्ड को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया है। इसी कड़ी में उत्तराखंड सरकार के राजस्व विभाग द्वारा Bhulekh Uttarakhand (देवभूमि) नामक एक आधिकारिक वेब पोर्टल का संचालन किया जाता है। अब उत्तराखंड के किसी भी जिले के नागरिकों को अपनी जमीन की खतौनी, खसरा नंबर या भू-नक्शा देखने के लिए सरकारी दफ्तरों या पटवारी के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। इस लेख में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि आप घर बैठे अपने मोबाइल या कंप्यूटर की मदद से Uttarakhand Bhulekh 2026 पोर्टल का उपयोग करके अपनी जमीन का रिकॉर्ड (ROR) ऑनलाइन कैसे चेक और डाउनलोड कर सकते हैं। उत्तराखंड भूलेख पोर्टल क्या है? (What is Devbhoomi Bhulekh Portal) उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी bhulekh.uk.gov.in एक कम्प्यूटरीकृत लैंड रिकॉर्ड प्रणाली...

मंगल चण्डिका स्तोत्र mangal chandika stotra

 मंगलीदोष निवारणार्थे मंगल चण्डिका स्तोत्र  

अगर आपकी कुण्डली में मांगलिक दोष है, जिसके कारन आपका  विवाह नहीं हो रहा हो  विवाह में विलम्ब हो रहा है या एक से अधिक विवाह का योग है तो अवश्य यह अनुष्ठान करना या करवाना चाहिए.. 

मंत्र 


आं ह्रीं श्रीं क्लीं सर्वपूज्ये देवी मंगलचण्डिके हूं हूं फट् स्वाहा 


मङ्गल चण्डिका स्तोत्र 


 || ध्यानम् ||


देवीं  षोडशवर्षीयां  शश्वत्सुस्थिरयौवनाम् | 

बिंबोष्ठीं सुदतीं शुद्धां शरत्पद्मनिभानननाम् || 

श्वेतचंपकवर्णाभां सुनीलोत्पल लोचनाम् | 

जगद्धात्रीं च दात्रीं च सर्वेभ्यः सर्वसंपदाम् |

संसार सागरे घोरे ज्योतिरुपां सदाभजे || 


|| स्तोत्रम् || 


|| महादेव उवाच || 


रक्ष रक्ष जगन्मातर्देवि मंगलचण्डिके |


 हारिके विपदां राशेर्हर्षमङ्गलकारिके || १ || 

हर्ष मंगलदक्षे च हर्षमंगलदायिके | 

शुभे मंगलदक्षे च शुभे मंगलचण्डिके || २ || 

मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगलमंगले | 

सतां मंगलदे देवि सर्वेषां मङ्गलालये || ३ || 

पूज्ये मंगलवारे च मङ्गलाभीष्ट देवते |

 पूज्ये मंगलभूपस्य मनुवंशस्य संततम् || ४ || 

मंगलधिष्ठातृ देवी मङ्गलानां च मंगले | 

संसारमंगलाधारे मोक्षमंगलदायिनी || ५ || 

सारे च मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम् |

 प्रतिमंगलवारे च पूज्ये मङ्गलसुखप्रदे || ६ || 

स्तोत्रेणानेन शंभुश्च स्तुत्वा मंगलचण्डिकाम् | 

प्रतिमंगलवारे च पूजांदत्वा गतः शिवः || ७ || 

प्रथमे पूजिता देवी शिवेन सर्वमङ्गला | 

द्वितीये पूजिता सा च मङ्गलेन ग्रहेण च || ८ || 

तृतीये पूजिता भद्रा मंगलेन नृपेण च |

 चतुर्थे मंगलवारे सुंदरीभिः प्रपूजिता || ९ || 

पंचमे मंगला कांक्षिनरैर्मङ्गल चण्डिका |

 पूजिता प्रतिविश्वेर्षु विश्वेशपूजिता सदा || १० || 

ततः सर्वत्र संपूज्या बभूव परमेश्वरी | 

देवैश्च मुनिभिश्चैव मानवैर्म नुभिर्मुनै || ११ || 

देवाश्च मंगलस्तोत्रं यः शृणोति समाहिताः | 

तन्मङ्गलं भवेत्तस्य न भवेतदमङ्गलम् || १२ || 

वर्धते पुत्रपौत्रैश्च मङ्गलं च दिने दिने ||  




टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दुर्गा सप्तशती पाठ 12 द्वादश अध्याय || by geetapress gorakhpur ||

  ।। श्री दुर्गा सप्तशती ॥ द्वादशोऽध्यायः देवी-चरित्रों के पाठ का माहात्म् ॥ध्यानम्॥ ॐ विद्युद्दामसमप्रभां मृगपतिस्कन्धस्थितां भीषणां कन्याभिः करवालखेटविलसद्धस्ताभिरासेविताम्। हस्तैश्चक्रगदासिखेटविशिखांश्चापं गुणं तर्जनीं बिभ्राणामनलात्मिकां शशिधरां दुर्गां त्रिनेत्रां भजे॥ मैं तीन नेत्रोंवाली दुर्गादेवी का ध्यान करता हूँ, उनके श्रीअंगों की प्रभा बिजली के समान है । वे सिंह के कंधेपर बैठी हुई भयंकर प्रतीत होती हैं । हाथों में तलवार और ढ़ाल लिये अनेक कन्याएँ उनकी सेवा में खड़ी हैं ।वे अपने हाथों में चक्र, गदा, तलवार, ढ़ाल, बाण, धनुष, पाश और तर्जनी मुद्रा धारण किये हुए हैं । उनका स्वरूप अग्निमय है तथा वे माथे पर चन्द्रमा का मुकुट धारण करती हैं । "ॐ" देव्युवाच॥१॥ एभिः स्तवैश्च् मां नित्यं स्तोष्यते यः समाहितः। तस्याहं सकलां बाधां नाशयिष्याम्यसंशयम्*॥२॥ देवी बोली- ॥१॥ देवताओं ! जो एकाग्रचित होकर प्रतिदिन इन स्तुतियों से मेरा स्तवन करेगा, उसकी सारी बाधा निश्चय हीं दूर कर दूँगी ॥२॥ मधुकैटभनाशं च महिषासुरघातनम्। कीर्तयिष्यन्ति ये तद्वद् वधं शुम्भनिशुम्भयोः॥३॥ जो मधुकैटभ का नाश, महिषा...

हनुमान चालीसा और आरती, बजरंग बाण श्रीं राम स्तुति || hanuman Chalisa ||

Hanuman Chalisa or Aarti:  मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है, इससे शनि जनित पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है, (चाहे शनि की ढैय्या हो या साढ़ेसाती) । इन दिनों में हनुमान जी के मंदिरों में जाकर भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं साथ ही इनका प्रिय बूंदी का प्रसाद चढ़ाते हैं। बजरंगबली को संकटमोचक भी कहा जाता है क्योंकि ये अपने भक्तों के सभी संकट दूर कर देते हैं। शास्त्रों और पुराणों अनुसार हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करके आरती करे और हनुमानजी को बूँदी का भोग लगाए. आइए शुरू करे हनुमान चालीसा का पाठ -    दोहा : श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।  बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।    चौपाई :   जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।     महाबीर बिक्रम बजरंग   कुमति निवार सुमति के संगी ।।   कंचन बरन बिराज सुबे...

दुर्गा सप्तशती पाठ 4 चतुर्थ अध्याय || by geetapress gorakhpur ||p

 ॥ श्री दुर्गा सप्तशती ॥ चतुर्थोऽध्यायः इन्द्रादि देवताओं द्वारा देवी की स्तुति ॥ध्यानम्॥ ॐ कालाभ्राभां कटाक्षैररिकुलभयदां मौलिबद्धेन्दुरेखां शड्‌खं चक्रं कृपाणं त्रिशिखमपि करैरुद्वहन्तीं त्रिनेत्राम्। सिंहस्कन्धाधिरूढां त्रिभुवनमखिलं तेजसा पूरयन्तीं ध्यायेद् दुर्गां जयाख्यां त्रिदशपरिवृतां सेवितां सिद्धिकामैः॥ सिद्धि की इच्छा रखनेवाले पुरुष जिनकी सेवा करते हैं तथा देवता जिन्हें सब ओर से घेरे रहते हैं, उन ‘जया ’ नामवाली दुर्गादेवी का ध्यान करे । उनके श्रीअंगों की आभा काले मेघ के समान श्याम है । वे अपने कटाक्षों से शत्रुसमूह को भय प्रदान करती हैं । उनके मस्तक पर आबद्ध चन्द्रमा की रेखा शोभा पाती है । वे अपने हाथों में शंख, चक्र, कृपाण और त्रिशूल धारण करती हैं । उनके तीन नेत्र हैं । वे सिंह के कंधेपर चढ़ी हुई हैं और अपने तेज से तीनों लोकोंको परिपूर्ण कर रही हैं । "ॐ" ऋषिरुवाच*॥१॥ शक्रादयः सुरगणा निहतेऽतिवीर्ये तस्मिन्दुरात्मनि सुरारिबले च देव्या। तां तुष्टुवुः प्रणतिनम्रशिरोधरांसा वाग्भिः प्रहर्षपुलकोद्‌गमचारुदेहाः॥२॥ ऋषि कहते हैं - ॥१॥ अत्यन्त पराक्रमी दुरात्मा महिषासुर तथा उसक...