कुँजापुरी माता मंदिर
कुंजापुरी देवी मंदिर उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 1676 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और ऋषिकेश से लगभग 25–30 किलोमीटर दूर है। यह मंदिर माँ दुर्गा के स्वरूप माँ कुंजापुरी को समर्पित है। यहाँ से हिमालय की बर्फीली चोटियाँ, सूर्योदय और गंगा घाटी का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है।
धार्मिक महत्व
कुंजापुरी देवी मंदिर को 51/52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह किया, तब भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंग अलग किए। माना जाता है कि यहाँ माता सती का ऊपरी भाग (कुंज/वक्षस्थल) गिरा था, इसलिए इस स्थान का नाम “कुंजापुरी” पड़ा।
इतिहास
मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी। बाद में मंदिर का पुनर्निर्माण और विकास हुआ। यह मंदिर उत्तराखंड के तीन प्रमुख सिद्धपीठों — कुंजापुरी, सुरकंडा देवी और चंद्रबदनी — के त्रिकोण का हिस्सा माना जाता है।
मंदिर की विशेषताएँ
मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 300 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
प्रवेश द्वार पर सिंह और हाथी की आकृतियाँ बनी हैं।
मंदिर परिसर से चौखंबा, बंदरपूँछ, गंगोत्री और स्वर्गारोहिणी पर्वत दिखाई देते हैं।
यहाँ सूर्योदय देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं।
दर्शन और आरती का समय
सामान्यतः मंदिर सुबह 5–6 बजे खुलता है और शाम 6–8 बजे तक खुला रहता है।
सुबह और शाम की आरती विशेष आकर्षण होती है।
कैसे पहुँचें
सड़क मार्ग
ऋषिकेश से टैक्सी या निजी वाहन द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। ऋषिकेश से निकलकर सबसे पहले नरेन्द्र नगर पड़ता है और यहां से 6km ऊपर हिंडोलखाल नामक स्थान इसका बेस पॉइंट है जहाँ से आप कुँजापुरी की मुख्य सड़क लेते हैं।
रेल मार्ग
निकटतम रेलवे स्टेशन:
Rishikesh Railway Station
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डा:
Jolly Grant Airport
ट्रेकिंग और पर्यटन
कुंजापुरी मंदिर ट्रेकिंग और योग प्रेमियों के लिए भी प्रसिद्ध है।
यहाँ से सूर्योदय ट्रेक बहुत लोकप्रिय है। आसपास के क्षेत्र:
Rishikesh
Neer Garh Waterfall
Rajaji National Park
प्रमुख त्योहार
नवरात्रि
दशहरा
कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेला
नवरात्रि के समय यहाँ हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
यात्रा के लिए सुझाव
सूर्योदय देखने के लिए सुबह जल्दी पहुँचना सबसे अच्छा रहता है।
सर्दियों में गर्म कपड़े साथ रखें।
सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, इसलिए आरामदायक जूते पहनें।
मंदिर में शालीन वस्त्र पहनना उचित माना जाता है।
रोचक तथ्य
यह स्थान ध्यान और योग के लिए भी प्रसिद्ध है।
यहाँ से हिमालय का 360° दृश्य दिखाई देता है।
चारधाम यात्रा पर जाने वाले कई श्रद्धालु यहाँ दर्शन करते हैं।
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