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मातंगी साधना समस्त प्रकार के भौतिक सुख प्रदान करती है maa matangi

माँ मातंगी साधना :  आप सभी को मेरा नमस्कार, आज मैं इस पोस्ट के माध्यम से आप सब को 9वी  महाविद्या माँ मातंगी की साधना के बारे में अवगत कराने का प्रयास करूँगा. मां के भक्त जन साल के किसी भी नवरात्री /गुप्त नवरात्री /अक्षय तृतीया या किसी भी शुभ मुहूर्त या शुक्ल पक्ष में शुरु कर सकते हैं. इस साल 2021 में गुप्त नवरात्री,  12 फरवरी 2021 से है,  मां को प्रसन्न कर सकते हैं और जो भी माँ मातंगी की साधना करना चाहते है, जो अपने जीवन में गृहस्थ समस्याओं से कलह कलेश आर्थिक तंगी ओर रोग ,तंत्र जादू टोना से पीड़ित है वो मां मातंगी जी की साधना एक बार जरूर करके देखे उन्हें जरूर लाभ होगा ये मेरा विश्वास है। मां अपने शरण में आए हुए हर भक्त की मनोकानाएं पूर्ण करती है।ये साधना रात को पूरे 10 बजे शुरू करे।इस साधना में आपको जो जरूरी सामग्री चाहिए वो कुछ इस प्रकार है।   मां मातंगी जी की प्रतिमा अगर आपको वो नहीं मिलती तो आप सुपारी को ही मां का रूप समझ कर उन्हें किसी भी तांबे या कांसे की थाली में अष्ट दल बना कर उस पर स्थापित करे ओर मां से प्रार्थना करे के मां मैं आपको नमस्कार करत...

मृतसञ्जीवन स्तोत्र अर्थ सहित " अकस्मात मृत्यु से रक्षा करता है यह स्तोत्र

मृतसञ्जीवन स्तोत्र,  ये स्तोत्र महर्षि वशिष्ठ द्वारा रचित है।  अकस्मात मृत्यु से रक्षा करता है यह  स्तोत्र और इसको  कवच रूप में पाठ किया जाता है। इस स्तोत्र में महेश्वर से सभी प्रकार से रक्षा करने की प्रार्थना की जाती है। आइए शुरू करते हैं...  ।। श्री मृतसञ्जीवन स्तोत्रम् ।। एवमारध्य गौरीशं देवं मृत्युञ्जयमेश्वरं। मृतसञ्जीवनं नाम्ना कवचं प्रजपेत् सदा ॥१॥ गौरीपति मृत्युञ्जयेश्र्वर भगवान् शंकर की विधिपूर्वक आराधना करने के पश्र्चात भक्तको सदा मृतसञ्जीवन नामक कवचका सुस्पष्ट पाठ करना चाहिये। सारात् सारतरं पुण्यं गुह्याद्गुह्यतरं शुभं।   महादेवस्य कवचं मृतसञ्जीवनामकं ॥ २॥ महादेव भगवान् शङ्कर का यह मृतसञ्जीवन नामक कवच का तत्त्वका भी तत्त्व है, पुण्यप्रद है गुह्य और मङ्गल प्रदान करनेवाला है। समाहितमना भूत्वा शृणुष्व कवचं शुभं। शृत्वैतद्दिव्य कवचं रहस्यं कुरु सर्वदा ॥३॥ [आचार्य शिष्य को उपदेश करते हैं कि – हे वत्स! ] अपने मनको एकाग्र करके इस मृतसञ्जीवन कवच को सुनो। यह परम कल्याणकारी दिव्य कवच है। इसकी गोपनीयता सदा बनाये रखना। वराभयकरो यज्वा सर्वदेवनिषेवितः। ...

शिव चन्द्रशेखर स्तुति Shiv chandrashekhar stuti

 चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहिमाम् । चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर रक्षमाम् ॥ रत्नसानु शरासनं रजताद्रि शृङ्ग निकेतनं शिञ्जिनीकृत पन्नगेश्वर मच्युतानल सायकम् । क्षिप्रदग्द पुरत्रयं त्रिदशालयै रभिवन्दितं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ 1 ॥ मत्तवारण मुख्यचर्म कृतोत्तरीय मनोहरं पङ्कजासन पद्मलोचन पूजिताङ्घ्रि सरोरुहम् । देव सिन्धु तरङ्ग श्रीकर सिक्त शुभ्र जटाधरं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ 2 ॥ कुण्डलीकृत कुण्डलीश्वर कुण्डलं वृषवाहनं नारदादि मुनीश्वर स्तुतवैभवं भुवनेश्वरम् । अन्धकान्तक माश्रितामर पादपं शमनान्तकं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ 3 ॥ पञ्चपादप पुष्पगन्ध पदाम्बुज द्वयशोभितं फाललोचन जातपावक दग्ध मन्मध विग्रहम् । भस्मदिग्द कलेबरं भवनाशनं भव मव्ययं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ 4 ॥ यक्ष राजसखं भगाक्ष हरं भुजङ्ग विभूषणम् शैलराज सुता परिष्कृत चारुवाम कलेबरम् । क्षेल नीलगलं परश्वध धारिणं मृगधारिणम् चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ 5 ॥ भेषजं भवरोगिणा मखिलापदा मपहारिणं दक्षयज्ञ विनाशनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलो...

शिवशक्ति कृत श्री गणाधीश स्तोत्र Shiva Shakti Kritam Shri Ganadhish Stotram

  शिवशक्ति कृत श्री गणाधीश स्तोत्र  श्रीगणाधीशस्तोत्रं शिवशक्तिकृतम् ॥ श्रीगणेशाय नमः । श्रीशक्तिशिवावूचतुः । नमस्ते गणनाथाय गणानां पतये नमः । भक्तिप्रियाय देवेश भक्तेभ्यः सुखदायक ॥ 1 ॥ स्वानन्दवासिने तुभ्यं सिद्धिबुद्धिवराय च । नाभिशेषाय देवाय ढुण्ढिराजाय ते नमः ॥ 2 ॥ वरदाभयहस्ताय नमः परशुधारिणे । नमस्ते सृणिहस्ताय नाभिशेषाय ते नमः ॥ 3 ॥ अनामयाय सर्वाय सर्वपूज्याय ते नमः । सगुणाय नमस्तुभ्यं ब्रह्मणे निर्गुणाय च ॥ 4 ॥ ब्रह्मभ्यो ब्रह्मदात्रे च गजानन नमोऽस्तु ते । आदिपूज्याय ज्येष्ठाय ज्येष्ठराजाय ते नमः ॥ 5 ॥  मात्रे पित्रे च सर्वेषां हेरम्बाय नमो नमः । अनादये च विघ्नेश विघ्नकर्त्रे नमो नमः ॥ 6 ॥ विघ्नहर्त्रे स्वभक्तानां लम्बोदर नमोऽस्तु ते । त्वदीयभक्तियोगेन योगीशाः शान्तिमागताः ॥ 7 ॥ किं स्तुवो योगरूपं तं प्रणमावश्च विघ्नपम् । तेन तुष्टो भव स्वामिन्नित्युकत्वा तं प्रणेमतुः ॥ 8 ॥ तावुत्थाप्य गणाधीश उवाच तौ महेश्वरौ । श्रीगणेश उवाच । भवत्कृतमिदं स्तोत्रं मम भक्तिविवर्धनम् ॥ 9 ॥ भविष्यति च सौख्यस्य पठते शुण्वते प्रदम् । भुक्तिमुक्तिप्रदं चैव पुत्रपौत्रादिकं तथा ॥ 10 ॥ धनधा...

शिव स्तुति Shiv Pujan Stuti

शिव स्तुति  Shiv Pujan Stuti स्फुटं स्फटिकसप्रभं स्फुटितहारक- श्रीजटंशशाङ्कदलशेखरं कपिलफुल्लनेत्रत्रयम्। तरक्षुवरकृत्तिमद्भुजगभूषणं भूतिमत्, कदा नु शितिकण्ठ ते वपुरवेक्षते वीक्षणम्॥१॥ त्रिलोचन! विलोचने वसति ते ललामायिते, स्मरो नियमघस्मरो नियमिनामभूद्भस्मसात्। स्वभक्तिलतया वशीकृतवती सतीयं सती, स्वभक्तवशगो भवानपि वशी प्रसीद प्रभो ॥२॥ महेशमहितोऽसि तत्पुरुष पूरुषाग्र्यो भवा-, नघोररिपुघोर ते नवम वामदेवाञ्जलिः॥ नमः सपदि जायते त्वमिति पञ्चरूपोचित-, प्रपञ्चचयपञ्चवृन्मम मनस्तमस्ताडय ॥३॥ रसाघनरसाऽनलाऽनिलवियद्विवस्वद्विधु-, प्रयष्टृषु निविष्टमित्यज भजामि मूर्त्यष्टकम्। प्रशान्तमुदभीषणं भुवनमोहनं चेत्यहो, वपूंषि गुणपूंषि तेऽहरहरात्मनोहं भिदे ॥४॥ विमुक्तिपरमाध्वनां तव षडद्धनामास्पदं, पदं निगमवेदिता जगति वामदेवादयः। कथंचिदुपशिक्षिता भगवतैव संविद्रते, वयन्तु विरलान्तराः कथमुमेश तन्मन्महे॥५॥ कठोरितकुठारया ललितशूलया वाहया, रणड्डमरुणा स्फुरद्धरिणया सखट्वांगया। चलाभिरचलाभिरप्यगणिताभिरुन्नृत्यत-, श्चतुर्दश जगन्ति ते जयजयेत्ययन् विस्मयम्॥६॥ पुरा त्रिपुरान्धनं विविधदैत्यविध्वंसनं, पराक्रमपरंपरा अपि परा ...

अर्धनारीश्वर स्तोत्रम Ardhanarishwara Stotram

  अर्धनारीश्वर स्तोत्रम् अर्द्धनारीश्वर स्तोत्रम्  च त्येयगौरार्ध शरीरकायै कर्पूरगौरार्धं अर्काय | धम्मिल्लितिकै च जटाधराय नमः शिवाय च नमः शिवाय || १ || कस्तूरिका कुंकुमचर्चितायैश्चरजःपुर्जे विचर्चिताय | कृतस्मरायैर्मस्मराय नम: शिवायै च नम: शिवाय || २ || झांटवक्तकंकना नूपुरायै पादब्जराजत्फानिन उपराय | हेमंगायै भुजगन गदाया नमः शिवायै च नमः शिवाय || ३ || विशालनीलोत्पललोचनायै विकसिप नकेरुहलोहनया | समानेनैक्समेक्षणाय नमः शिवायै च नमः शिवाय || ४ || मन्दरमलाकलितलकाय कपलमलाित्कितकन्धराय | दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय नमः शिवायै च नमः शिवाय || ५ || अम्बोधरश्यामलकुमारलायै ताती तपप्रभातंरजा तधरया | निर् नालश्रयाय निखिलेश्वराय नम: शिवायै च नम: शिवाय || ६ || प्रपञ्चश्र्ण तुयुन्मुखला सखाही सर्वसा महार्कताण्डे | जगज्जनन्यै जगदेकित्रे नमः शिवायै च नमः शिवाय || न्य || प्रदीप्तरत्नोज्ज्वलकुण्डलायै स्फुरन्महापन्नगभूषणय | शिवस्वितायै च शिवलितायै नमः शिवायै च नमः शिवाय || य || एतत्पथेदश तकमीश तदम यो भक्त्या मान्यो भुवि डलरघगलवी | प्राप्नोति सौभाग्यमनन्तकालम् भूयात् सदा तस्य सर्वसिद्धिः || ९ || || इत...

भज गोविन्द स्तुति आदि गुरु श्री शंकराचार्य विरचित

भज गोविन्द स्तुति  आदि गुरु श्री शंकराचार्य विरचित भजगोविन्दं भजगोविन्दं गोविन्दं भजमूढमते । संप्राप्ते सन्निहिते काले नहि नहि रक्षति डुकृञ्करणे ॥ १ ॥ भज गोविन्दम, भज गोविन्दम, गोविन्दम भज मूढ़ मते! कलवित काल करे जेहि काले, नियम व्याकरण, क्या करते? भज गोविन्दम भज गोविन्दम, गोविन्दम भज मूढ़ मते! ॥१॥ मूढ जहीहि धनागमतृष्णां कुरु सद्बुद्धिं मनसि वितृष्णाम् । यल्लभसे निजकर्मोपात्तं वित्तं तेन विनोदय चित्तम् ॥ २ ॥ माया जोड़े, काया तोड़े, ढेर लगा कब सुख मिलते, जो भी करम किये थे पहले, उनके ही फल अब फलते. भज गोविन्दम, भज गोविन्दम, गोविन्दम भज मूढ़ मते ॥२॥ नारीस्तनभर नाभीदेशं दृष्ट्वा मागामोहावेशम् । एतन्मांसावसादि विकारं मनसि विचिन्तय वारं वारम् ॥ ३ ॥ नारी तन, मोहित मन मोहा, अंदर माँस नहीं दिखते, बार-बार सोचो मन मूरख, हाड़ माँस पर क्यूँ बिकते. भज गोविन्दम , भज गोविन्दम, गोविन्दम भज मूढ़ मते ॥३॥ नलिनीदलगत जलमतितरलं तद्वज्जीवितमतिशयचपलम् । विद्धि व्याध्यभिमानग्रस्तं लोकं शोकहतं च समस्तम् ॥ ४ ॥ कमल पात, जल बिंदु न रुकते, अस्थिर, दूजे पल बहते, अहम् ग्रसित अस्थिर संसारा , रोग, शोक, दुःख ...